Bharat Vyas once used to work in Bikaner’s restaurant, then became the life of the film world, today after 39 years the museum could not even give the name of the street. | ऐ मालिक तेरे बंदे हम… जैसा अमर गीत लिखने वाले गीतकार बीकानेर के रेस्टोरेंट में काम करते थे; किताब के लिए लिखते थे, फैन ने मुंबई पहुंचाया

Bharat Vyas once used to work in Bikaner's restaurant, then became the life of the film world, today after 39 years the museum could not even give the name of the street. | ऐ मालिक तेरे बंदे हम... जैसा अमर गीत लिखने वाले गीतकार बीकानेर के रेस्टोरेंट में काम करते थे; किताब के लिए लिखते थे, फैन ने मुंबई पहुंचाया
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बीकानेर33 मिनट पहले

“ऐ मालिक तेरे बंदे हम

ऐसे हो हमारे करम

नेकी पर चलें

और बदी से टलें

ताकि हंसते हुये निकले दम”

ये महज किसी फिल्मी गीत का हिस्सा नहीं है बल्कि आज हजारों स्कूल्स में होने वाली प्रार्थना भी है। ऐसा ही एक गीत है… आ लाैट के आजा मेरे मीत, तुझे मेरे गीत बुलाते हैं, मेरा सूना पड़ा रे संगीत तुझे मेरे गीत बुलाते हैं। ऐसे ही दर्जनों गीत हिन्दी फिल्म जगत को देने वाले भरत व्यास को उन्हीं के शहर ने भूला दिया। बीकानेर में जन्मे भरत व्यास आज ही के दिन 4 जुलाई 1982 को दुनिया से अलविदा हो गए थे लेकिन जीवन के अंतिम दिनों में उनके दिल में यह टीस थी कि जिस बीकानेर में वो जन्मे, पले-बढ़े वहां उनको कोई याद नहीं करता। भरत व्यास के निधन के 39 साल बाद भी इस शहर ने उनके नाम से एक म्यूजियम तो दूर गली का नाम तक नहीं रखा। यहां गुलामी के प्रतीक किंग एडवर्ड के नाम से सड़क है, लेकिन भरत व्यास को शहर ने कभी याद नहीं किया।

हिन्दी फिल्म जगत के कभी न बुझने वाले इस सितारे ने पृथ्वीराज कपूर, लक्ष्मीकांत प्यारे लाल, वी. शांताराम, मुकेश, मोहम्मद रफी जैसी हस्तियों के साथ काम किया है। भरत व्यास की भतीजी यामिनी जोशी बताती है कि जीवन के अंतिम दिनों काफी बीमार रहे। बीकानेर को तब भी बहुत याद करते थे। दुख है कि उस बीकानेर ने कभी भरत व्यास को याद नहीं किया। वो कहीं भी अपना परिचय देते तो कहते थे कि मैं मूल रूप से चूरू का हूं लेकिन जन्म बीकानेर में हुआ। वहीं रहा, वहीं पढ़ा।

वो जब भी बीकानेर आते तो शहर की हर गली मोहल्ले में जाते, रिश्तेदारों से मिलते। यामिनी कहती है कि न सिर्फ बीकानेर बल्कि पूरे राजस्थान का नाम रोशन करने वाले भरत व्यास को सरकार ने भी याद नहीं किया। कई बड़े कलाकारों के नाम से पुरस्कार दिए जाते रहे हैं, लेकिन भरत व्यास के नाम से कभी कोई अवार्ड तक नहीं दिया गया। यह सुध भी नहीं ली गई कि उनका परिवार आज कहां है?

यहां हुआ था जन्म
भरत व्यास का जन्म बीकानेर के झंवरों के चौक में हुआ था। साले की होली के पास स्थित इस चौक में उनका ननिहाल था। वहीं जन्म हुआ और बाद में अपने ननिहाल काफी रहे। बचपन में ही माता-पिता की मौत के बाद वो अपने चाचा जनार्दन व्यास के पास रहे। बीकानेर के डूंगर कॉलेज में पढ़े और फुटबॉल के शानदार खिलाड़ी भी थे।

बीकानेर के रेस्टोरेंट में किया काम
भरत व्यास का परिवार तब आर्थिक रूप से ज्यादा मजबूत नहीं था। उनके भाई जनार्दन व्यास ने यहां रतन बिहारी पार्क के पास एक रेस्टोरेंट खोला था। इस रेस्टोरेंट में भरत व्यास काम करते थे। काफी समय काम करने के बाद भरत व्यास का मन उखड़ गया। तब वो एक पुस्तक में गीत लिखते थे। उनके ही एक फैन उन्हें बीकानेर से मुंबई ले गए। वहां उनके गीत फिल्मी हस्तियों को पसन्द आ गए।

बेटे के लिए लिखे दो गीत, हो गए अमर
भरत व्यास के पुत्र जब उनसे नाराज होकर घर से चले गए तो भरत व्यास ने दो गीत लिखे। दिल से लिखे ये दोनों गीत आज फिल्मी जगत में अमर है। पहला गीत “आ लौट के आजा मेरे मीत, तुझे मेरे गीत बुलाते हैं, मेरा सूना पड़ा रे संगीत, तूझे मेरे गीत बुलाते हैं।” दूसरा गीत लिखा “ज़रा सामने तो आओ छलिये छुप-छुप छलने में क्या राज है, यूं छुप ना सकेगा परमात्मा, मेरी आत्मा की ये आवाज है…”। बाद में उनके पुत्र तो घर आ गए, लेकिन गीत फिल्मी दुनिया के नगीने बन गए।

वी. शांताराम ने कहा था, ये प्रार्थना अमर होगी
फिल्म दो आंखे बारह हाथ बना रहे वी. शांताराम ने भरत व्यास से एक प्रार्थना लिखने के लिए बोला तो एक प्रार्थना लिखी गई। वी. शांताराम ने कहा कि भरत इसे दोबारा लिखो, ये प्रार्थना ऐसी हो कि हर धर्म का बंदा गा सके। भरत व्यास ने घर जाकर रात भर में एक प्रार्थना लिखी और अगले दिन वी. शांताराम को दे दी। इस प्रार्थना की पहली पंक्ति पढ़कर ही वी.शांताराम ने कह दिया कि ये प्रार्थना अमर होगी। हमेशा गाई जाने वाली है। यह प्रार्थना थी “ए मालिक तेरे बंदे हम…। ” ये प्रार्थना आज हजारों स्कूलों में गाई जाती है। यहां तक कि देश की कई जेलों में बंदी भी इसे गाते हैं ताकि सही मार्ग मिल सके।

राजस्थानी में भी किया काम
भरत व्यास और उनके भाई बीएम व्यास ने न सिर्फ गीत लिखे बल्कि कई फिल्मों में गीत गाए भी। “म्हारी प्यारी चनणा” नाम की राजस्थानी फिल्म लिखी, उसमें गीत लिखे, यहां तक कि उसमें अभिनय भी किया। बीएम व्यास का अभिनय तो आज भी राजस्थान को याद है।

बस… ये शहर ही भूल गया
भरत व्यास ने अपने हर परिचय में बीकानेर का नाम लिया। उनका परिवार मूल रूप से चूरू का है लेकिन बीकानेर को ही उन्होंने जिया था। उनकी भतीजी और बीएम व्यास की बेटी यामिनी जोशी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि नि सिर्फ बीकानेर प्रशासन, नगर निगम और नगर विकास न्यास को बल्कि राज्य सरकार को भी भरत व्यास के लिए एक म्यूजियम बनाना चाहिए। इस शहर की नई पीढ़ी को पता चलना चाहिए कि उनके शहर में जन्में एक शख्स ने किस बुलंदी को हासिल किया था।

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