Dharmendra’s heartbreaking conversation with Saira bano after Dilip Kumar’s death | धर्मेंद्र बोले, दिलीप कुमार के निधन के बाद जब उनके घर गया तो सायरा बोलीं-‘देखो धरम, साहब ने पलक झपकाई, ये सुनकर मेरी जान निकल गई’

Dharmendra's heartbreaking conversation with Saira bano after Dilip Kumar's death | धर्मेंद्र बोले, दिलीप कुमार के निधन के बाद जब उनके घर गया तो सायरा बोलीं-'देखो धरम, साहब ने पलक झपकाई, ये सुनकर मेरी जान निकल गई'

2 मिनट पहले

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98 साल के दिलीप कुमार के इंतकाल से बॉलीवुड में शोक की लहर है। हर कोई ट्रेजेडी किंग के निधन से गमगीन है। 7 जुलाई को उन्होंने मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में अंतिम सांस ली और फिर चल बसे। बुधवार शाम राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। इससे पहले उन्हें श्रद्धांजलि देने कई बॉलीवुड हस्तियां पहुंचीं। इनमें से एक धर्मेंद्र भी थे जो दिलीप कुमार के निधन की खबर सुनकर बेहद मायूस हो गए। वह उनके घर जाकर सायरा बानो से मिले।

धर्मेंद्र ने सायरा से मुलाकात के बारे में कुछ बातें अपने सोशल मीडिया पर शेयर की हैं। धर्मेंद्र ने एक तस्वीर शेयर की जिसमें वह दिलीप कुमार के पार्थिव शरीर के पास बैठकर रोते दिख रहे हैं और लिखा, ‘सायरा ने जब कहा, धरम देखो साहब ने पलक झपकाई है’ दोस्तों ये सुनकर जान निकल गई मेरी, मालिक मेरे प्यारे भाई को जन्नत नसीब करे, मुझे दिखावा नहीं आता लेकिन मैं अपने जज्बात पर काबू नहीं रख पाता। अपना समझकर कह जाता हूं।

इससे पहले धर्मेंद्र ने सोशल मीडिया पर दिलीप कुमार को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा था, इंडस्ट्री में अपने सबसे अजीज भाई को खोने की बहुत-बहुत दुखद खबर, जन्नत नसीब हो, हमारे दिलीप साहब को…

पेशावर में हुआ था जन्म

दिलीप कुमार का जन्म 11 दिसंबर, 1922 को ब्रिटिश इंडिया के पेशावर (अब पाकिस्तान में) में हुआ था। दिलीप साहब के पिता लाला गुलाम सरवर खान और माता आयशा बेगम ने अपने बेटे का नाम यूसुफ खान रखा था। 1944 में फिल्म ‘ज्वार भाटा’ रिलीज हुई थी। इस फिल्म के जरिए इंडियन सिनेमा की पहली स्टार एक्ट्रेस देविका रानी ने यूसुफ खान को दिलीप कुमार के नाम से पेश किया।

करीब 60 फिल्मों में किया काम

पद्मभूषण से दादा साहब फाल्के तक इस महानायक ने अपने करियर के दौरान करीब 60 फिल्मों में काम किया। उन्होंने हमेशा इस बात का ध्यान रखा कि अभिनय के चलते उनकी इमेज खराब ना हो। उन्हें उनके अभिनय के लिए भारत सरकार ने 1991 में पद्मभूषण से नवाजा था। वहीं, 1995 में फिल्म का सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान दादा साहब फाल्के अवॉर्ड भी उन्हें मिल चुका है। इतना ही नहीं, पाकिस्तान सरकार ने भी उन्हें 1997 में ‘निशान-ए-इम्तियाज’ से नवाजा, जो पाकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।

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