Ghar Ghar Bajega Kailash Kher Ka Damaru: Damroo App Will Become Platform For New Singers | भारत और विदेश के हर जॉनर के नॉन-फ़िल्मी संगीत का सागर ‘डमरू’ में लेकर आये हैं कैलाश खेर

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7 घंटे पहलेलेखक: मनीषा भल्ला

  • कैलाश खेर एकेडमी फॉर लर्निंग आर्ट में संगीत के साधक पैदा होंगे
  • यह ऐप नये गायको के लिए भी प्लेटफार्म बनेगा

कैलाश और डमरू। एक वह, जहां खुद शिवजी निवास करते हैं और दूसरा वह जो सदा शिवजी के हाथों में निवास करता है। भारतीय आध्यात्मिक संगीत में नये आयाम रचने वाले शिवभक्त ‘कैलाश खेर’ ने जब खुद अपना एप बनाया तो उसको भी नाम दिया ‘डमरू’। यह ऐप भारत की हर भाषा और और विदेश का भी लोक संगीत, आध्यात्मिक संगीत और नयी प्रतिभाओं के गाने समेत हर जॉनर के नॉन फिल्मी गानों का महासागर है। 18 भाषाओं में अपने संगीत का जादू बिखेर चुके और पद्मश्री से सम्मानित ‘कैलाश खेर’ सामाजिक सरोकार के मुद्दे पर भी संगीत से प्रदान करते हैं। ‘दैनिक भास्कर’ से हुई उनकी बातचीत के कुछ अंश:

गीत-संगीत के बहुत सारे ऐप हैं​​​​ , ‘डमरू’ में खास क्या है?
आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है। हमारे यहां म्यूज़िक तो बहुत बन रहा है, हर जगह बज भी रहा है, लेकिन वह सब फिल्मी है। हम भारत का छिपा और गुम हो चुका लोक गायन, गायक सामने लाना चाहते थे। इसमें अध्यात्म से जुड़ा संगीत का खजाना है।

इसमें कितने गाने हैं?
डमरू दुनिया की पहली और एकमात्र ऐसा ऐप है, जिसमें 20 से ज्यादा भाषाओं में लाखों गाने हैं। यह पूरी तरह से एक स्वदेशी ऐप है, जिसमें हर जॉनर का गीत है। इसे संगीत का सागर कहा जा सकता है।

सिर्फ भारतीय संगीत है ?
इसमें भारत का ही नहीं बल्कि विदेशों का भी लोकगीत है और भारत के हर कोने के गीत हैं। भारत की हर भाषा का हर तरह का संगीत यहां मिलेगा। हर तरह के नॉन फिल्मी गाने यह ऐप पर मिलेंगे। यही नहीं हर मूड का संगीत है। डाटा बताता है कि दुनिया के हर कोने में हर समय हर धर्म, समुदाय और उम्र के लोग यहां गाने सुन रहें है।

अभी कौन सा गाना हिट है ?
‘यह है बदलता भारत, नए हौसले का नया भारत…’ सबसे ज्यादा स्ट्रीम हो रहा है। चाहे वह इश्क अनोखा हो या दीवानी, कैलाश जॉनर के फिल्मी गीत भी सुने जा रहे हैं।

आप जन्मदिन कुछ खास प्रकार से मनाते है ?
जन्मदिन पर मुझे केक काटना, कैंडल जलाना-बुझाना नहीं आता है। मेरे जन्मदिन पर मैं देसी घी के एक क्विंटल लड्डू बंटवाता हूं और सबसे अहम कि मैं इस दिन नए गायकों को लॉन्च करता हूं, गायकों की नई खेप को मंच देता हूं। कोई नया गायक आये तो लोग इसे कॉम्पिटिशन समझते हैं कि कोई मेरा पेट न काट दे, मेरे कॉम्पिटिशन में ही खड़ा न हो जाए। लोग अपने चेलों तक को आगे नहीं बढ़ाते हैं। पर मैं इसे बीते 5 साल से कर रहा हूं। मैं नए हुनर के दीप जलाता हूं।

इतने सारे गाने, 1800 से ज्यादा कॉन्सर्ट अब आगे क्या?
मैं चमकदार दुनिया से आकर्षित नहीं होता हूं, समुद्र किनारे एक मंजिल के मकान में रहता हूं, ग्लैमर से एक दम अलग हूं, साधना और तपस्या को बहुत बड़ा मानता हूं। अब मैं इसी साल संगीत की अगली पौध तैयार करने में जुट रहा हूं।

क्या कोई खास प्रोजेक्ट है?
मेरे जीवन का मूलमंत्र है “ईच वन टीच वन”। यह मेरे अंदर पागलपन है, जुनून है। उसी कड़ी में हम लोगों ने कैलाश खेर एकेडमी फॉर लर्निंग आर्ट की नींव रखी जिसमें कला डॉट.इन ऑनलाइन होगा और कला धाम भौतिक रूप से होगा। मुंबई में समुद्र किनारे ही यह आकार लेगा।

क्या यह संगीत विद्यालय होगा?
हम जो खो चुके है वह वापस पाना है। जहां संगीत के साथ साथ लिरिक्स, भाषा की शुद्धता भी सिखाई जाए ऐसी कोई संस्था नहीं है। यहां सब एक साथ होगा।

ऐसी संस्था की जरूरत क्यों लगी?
अभी संगीत परोसने के लिए साधन बहुत है पर साधक कम हो रहें है। कैलाश खेर एकेडमी फॉर लर्निंग आर्ट में पूरे भारत से बिना तराशे हुए हीरे लायेंगे। जिसे स्टार बनने की बीमारी हो उनके लिए यह जगह नहीं होगी। यहां सिर्फ साधक तैयार होंगे।

निशुल्क एप, विज्ञापन भी नहीं
‘डमरू’ ऐप के सीईओ राम मित्र ने बताया कि नॉन फिल्मी संगीत को पसंद करने वाले यहां निशुल्क आनंद ले सकेंगे। यहां बीच में कोई विज्ञापन भी नहीं चलेगा। यह ऐप एंड्रॉइड और आईओएस दोनो ओएस के लिए उपलब्ध है। हमारे डेवलपर ने खास सुनिश्चित किया है किकि श्रोताओं को श्रेष्ठ साउंड का आनंद मिले।

यह गायकों के लिए भी प्लेटफार्म
राम मिश्र ने यह भी बताया कि भारत के कोने-कोने में ऐसे ऐसे प्रतिभाशाली लोग हैं जिन्हें ऐसे प्लेटफोर्म की जरूरत है जो उनके गानों को डिस्ट्रिब्यूट कर सके, प्रोमोट कर सके, फैंस बढ़ा सके। हमें ऐसे कई कलाकार मिले जो सीधे तौर पर हमें म्यूज़िक देना चाहते थे। इस तरह का नॉन फिल्मी फोक्स्ड डेडिकेटेड ऐप आज तक उन्हें नहीं मिला था।

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