Interview with dainik bhaskar: Lata Mangeshkar condoles Dilip Kumar’s death | लता मंगेशकर ने कहा-कोर्ट में खड़े होकर मेरा भी केस लड़े थे दिलीप कुमार, जीतने पर कहा था-मस्त रहो मेरी बहना

Interview with dainik bhaskar: Lata Mangeshkar condoles Dilip Kumar's death | लता मंगेशकर ने कहा-कोर्ट में खड़े होकर मेरा भी केस लड़े थे दिलीप कुमार, जीतने पर कहा था-मस्त रहो मेरी बहना

मुंबई14 मिनट पहलेलेखक: उमेश कुमार उपाध्याय

  • कॉपी लिंक

दिग्गज एक्टर दिलीप कुमार का बुधवार को 98 साल की उम्र में निधन हो गया है। उनके निधन पर उनके फैंस, फ्रेंड्स और फैमिली मेंबर्स सोशल मीडिया पोस्ट शेयर कर उन्हें याद कर रहे हैं। इस बीच दैनिक भास्कर के साथ खास बातचीत में लता मंगेशकर ने दिलीप कुमार को याद किया और दुख व्यक्त करते हुए कहा कि मेरी तबियत तो ठीक है, पर मन ठीक नहीं है। दिलीप कुमार की खबर सुनकर बहुत शॉक-सा लगा है, लेकिन क्या करें, यही दुनिया है। साथ ही उन्होंने दिलीप कुमार से जुड़ी कुछ यादें भी शेयर की हैं।

लता मंगेशकर ने कहा, “दिलीप कुमार के साथ की सबसे रोचक याद यह है कि उनके साथ गाना गाया था। वे अच्छा गाते थे, मगर माइक पर पहली मर्तबा गा रहे थे, तब जरा घबराए हुए थे। सलिल चौधरी जी ने कहा- यूसुफ! तुम बिल्कुल डरो नहीं, बस गाते रहो। तुमको जो गाना है, वह गाओ। फिर तो उन्होंने आंखें बंद की और क्लासिकल गाना शुरू कर दिया। वह इतना लंबा चला कि सलिल चौधरी उनके सामने खड़े होकर बंद करो, बंद करो का इशारा करने लगे, लेकिन उनकी आंखें बंद थी, सो वे गाते गए, गाते गए। जब आंखें खोली, तब देखा कि सामने सलिल दा खड़े थे। उन्होंने कहा- यूसुफ तुमने बहुत अच्छा गाया। यह हम कहीं और यूज करेंगे। अभी जो गाना है, उसे करते हैं। इस तरह वह गाना रिकॉर्ड हुआ। उस दिन उन्हें देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा कि वे कितने मस्त होकर गा रहे थे। मुझे इतना ही याद है कि इसकी रिकॉर्डिंग महबूब स्टूडियो में हो रही थी और फिल्म के डायरेक्टर ऋषिकेश मुखर्जी थे। फिल्म मुसाफिर थी और गाना लागी नाहीं छूटे रामा, चाहे जिया जाए था।”

लता मंगेशकर ने आगे कहा, “अमूमन वे गाने की रिकॉडिंग में नहीं आते थे। ज्यादातर शूटिंग में बिजी रहते थे। अपने काम में एकदम खो जाते थे। शायद गंगा जमुना के वक्त रिकॉर्डिंग में आए थे, पर मुझे पूरी तरह से याद नहीं है। वे इतने जबर्दस्त हिम्मत वाले आदमी थे कि किसी बात से डरते नहीं थे। और जो काम जानते नहीं थे, वह जरूर कर देते थे। ऐसा एक किस्सा हुआ था, यह बहुत पुरानी बात है। शायद 1963-1964 की बात होगी। एक प्रोड्यूसर थे। उन्होंने हमारे ऊपर केस कर दिया था। इसमें मेरा, यूसुफ भाई और भी एक आदमी का नाम था। उन्होंने केस किया था कि ये हमसे ब्लैक मनी लेते हैं। यह जानकर यूसुफ भाई को बहुत खराब लगा। कहने लगे- यह आदमी मेरे लिए ऐसा बोल रहा है। उनके असिस्टेंट ने कहा कि हम लोग कोर्ट में जाएंगे और केस लड़ेंगे। तब वे कहने लगे कि हां, बिल्कुल जाएंगे। यह केस मैं लड़ूंगा। असिस्टेंट कहने लगा कि केस लड़ने वाला तो वकील होता है साहब, आप वहां क्या करेंगे? कहने लगे कि मैं वकील बनकर जाऊंगा और केस लड़ूंगा। उन्होंने असिस्टेंट से कहा कि कोर्ट से एक महीना का वक्त मांग लो। मैंने कहा कि यूसुफ भाई प्रोड्यूसर ने मेरे ऊपर भी केस किया है।”

लता मंगेशकर ने बताया, “मुझसे पूछने लगे कि तुम्हारे ऊपर कितने रुपए का केस किया है। मैंने बताया- मेरे ऊपर 600 रुपए का है। यह 600 रुपए भी मैंने दो-तीन गाने के लिए हैं, जो साइन करके लाई हूं। उन्होंने सबका नाम पूछा। मैंने बताया कि हम तीन लोग हैं। तब कहने लगे- मैं सबका केस लड़ूंगा। उन्होंने वकालत की सारी किताबें पढ़ी और समय आने पर कोर्ट में जाकर खड़े हो गए। वे इतना बोले कि हम लोग केस जीत गए और सामने वाला प्रोड्यूसर हार गया। उनमें ऐसी हिम्मत थी। जब केस जीतने के बाद मुझे उनका फोन आया। कहने लगे कि तुम मस्त रहो मेरी बहना। हम लोग जीत गए हैं। बहुत कमाल आदमी थे। बहरहाल, दिलीप कुमार पर प्रोड्यूसर ने एक हजार, मेरे ऊपर 600 रुपए और तीसरे आदमी पर भी इसी तरह हजार-दो हजार खाने का आरोप लगाया था। उस समय 600 रुपए भी बहुत बड़ी रकम होती थी।”

लता मंगेशकर ने कहा, “उनको सब कुछ बहुत अच्छे से याद रहता था। उनकी उर्दू तो कमाल की थी। उन्हें कितने सारे शेर याद थे। उनके धर्म की जो कुछ चीजें हैं, वह सब भी उनको याद था। कमाल के आदमी थे। मुझे तो बहन कहते थे। मैं उनको राखी भी बांधती थी। मुझे अगर कोई तकलीफ होती थी, तब पूछते थे कि कोई तकलीफ है तो मुझे बताना। कहते थे- मेरी मुख्तसिर बहन। मेरे प्रोग्राम में वे लंदन आए थे। मेरे बारे में इतना अच्छा बोला कि वह सब जगह बजने लगा। आज भी सोशल साइट पर मौजूद है। इतनी अच्छी उर्दू बोले थे कि लोग सुनकर हैरान हो गए कि ऐसे भी लोग फिल्म इंडस्ट्री में होते हैं।”

लता मंगेशकर ने सोशल मीडिया पर दिलीप कुमार के साथ की कई फोटो शेयर कर भी उन्हें श्रद्धांजलि दी है। इन फोटोज के कैप्शन में उन्होंने लिखा, “यूसुफ भाई आज अपनी छोटीसी बहन को छोड़के चले गए। यूसुफ भाई क्या गए, एक युग का अंत हो गया। मुझे कुछ सूझ नहीं रहा। मैं बहुत दुखी और नि:शब्द हूं। कई बातें कई यादें हमें देके चले गए। यूसुफ भाई पिछले कई सालों से बिमार थे, किसी को पहचान नहीं पाते थे ऐसे वक्त सायरा भाभी ने सब छोड़कर उनकी दिन रात सेवा की है उनके लिए दूसरा कुछ जीवन नहीं था। ऐसी औरत को मैं प्रणाम करती हूं और यूसुफ भाई की आत्मा को शांति मिले ये दुआ करती हूं।”

खबरें और भी हैं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *