‘Thalaivi’ PVR is disappointed Over Kangana’s Demand For 2-week Window For Hindi Version of this film | फिल्म की रिलीज पर साउथ में है सब कुछ ‘चंगा’, लेकिन हिंदी में बरकरार है ‘पंगा’

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7 मिनट पहलेलेखक: अमित कर्ण

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कंगना रनोट की अपकमिंग फिल्‍म ‘थलाईवी’ इस 10 सितंबर को साउथ में तो आसानी से रिलीज हो रही है। नॉर्थ इंडिया में यकीनन रविवार को खबर लिखने तक निर्माताओं और मल्‍टीप्‍लेक्‍स मालिकों के बीच गतिरोध बना हुआ था। सिनेमाघर संचालकों की गुजारिश है कि निर्माता अपनी फिल्‍म ‘थलाईवी’ को सिनेमाघरों में चार हफ्तों तक चलने के बाद ही ओटीटी प्‍लेटफॉर्म पर स्‍ट्रीम होने देंगे। उधर, निर्माता विष्‍णुवर्धन इंदुरी का तर्क है कि फिल्‍म बड़े बजट की है। वह लागत तब ही निकल सकेगी, जब वो सिनेमाघरों के दो हफ्ते के गैप पर ही फिल्‍म ओटीटी पर दे दें। यह डील पहले ही हो चुकी है। साउथ इंडियन लैंग्‍वेज के लिहाज से यह फिल्म फैन्स को अमेजन प्राइम पर देखने को मिलेगी। वहीं हिंदी लैंग्‍वेज में यह नेटफ्ल‍िक्‍स पर देखने को मिलेगी। इन सबके बीच कंगना रनोट ने जरूर सिनेमाघर संचालकों को राहत के संकेत दिए हैं। उन्‍होंने कहा है कि इसके बीच का रास्‍ता निकाला जाएगा।

विष्‍णुवर्धन ने कहा मौजूदा हालातों के चलते थिएटर बिजनेस बहुत अनिश्चित है

विष्‍णुवर्धन इंदुरी ने दैनिक भास्‍कर से खास बातचीत की और कहा, “नॉर्थ के सिनेमाघर संचालक अपना बचाव करने में लगे हैं। मैं बतौर निर्माता अपने निवेश को सुरक्षित करने में लगा हूं। साउथ में तो हम दोनों पक्षों को कोई दिक्‍कत नहीं है। नॉर्थ में हिंदी के लिए सिनेमाघर संचालक चाहते हैं कि हम चार हफ्तों के गैप के बाद ही ओटीटी पर जाएं। लेकिन वह मुमकिन नहीं है। हम नॉर्थ में दो हफ्ते के बाद ओटीटी पर जाएंगे तो ही हमारे निवेश सेफ रह पाएंगे और लागत निकल सकेगी। वह इसलिए कि मौजूदा हालातों के चलते थिएटर बिजनेस बहुत अनिश्चित है। वहां से हमारी कितनी रिकवरी हो सकेगी, वह पता नहीं है। ओटीटी से हमें साफ कहा गया है कि अगर मैं सिनेमाघरों में आने के चार हफ्ते बाद आया तो हमें कम पैसे मिलेंगे और दो हफ्ते बाद ही आया तो ज्‍यादा पैसे मिलेंगे।”

कुणाल साहनी ने सिनेमाघर वालों के पक्ष में रखी अपनी राय

उधर, कार्निवल सिने चेन के कुणाल साहनी सिनेमाघर वालों का पक्ष रखते हैं और कहते हैं, “अगर ‘थलाईवी’ को उनके निर्माता हमारे यहां आने के दो हफ्ते बाद ही ओटीटी पर जातें हैं, तो वह हमें फिलहाल तो मंजूर नहीं है। कोविड से पहले सिनेमाघरों और ओटीटी के बीच फिल्‍म रिलीज का फासला आठ वीक का रहता था। वह हम चार वीक ऑलरेडी कर चुके हैं। अब उसे भी घटाकर दो वीक कर दें तो हमारे इंटरेस्‍ट कहां से सेफगार्ड हो सकेंगे। साउथ के लिए तो मेकर्स ने चार वीक का गैप माना है। हमें उम्‍मीद है कि हिंदी के लिए भी वो दो वीक के बजाय चार वीक के गैप पर मान जाएंगे।”

कमल ज्ञानचंदानी करते हैं कंगना रनोट के रवैये का सम्‍मान

पीवीआर सिने चेन के प्रमुख कमल ज्ञानचंदानी के मुताबिक, “हमने अपना स्‍टेटमेंट जारी कर दिया है। हिंदी के लिए भी निर्माताओं को चार वीक गैप की बात माननी चाहिए। हम कंगना रनोट के रवैये का सम्‍मान करते हैं। उनका बयान है कि वो फिल्‍म के निर्माताओं से बात करेंगी और बीच का रास्‍ता निकालेंगी। देखतें हैं फायनली इसके लिए निर्माता क्‍या लचीला रुख अपनाते हैं।”

राज बंसल ने दी इस मुद्दे पर अपनी सलह

पूरे प्रकरण पर गंभीरता से नजर रख रहे ट्रेड एनैलिस्‍ट और डिस्‍ट्रीब्‍यूटर राज बंसल अपनी राय रखते हैं। राज बताते हैं, “कोविड से पहले सिनेमाघर वाले अपनी शर्तें लादने की सिचुएशन में रहते थे। अब ऐसा नहीं है। प्रोड्यूसर बड़ी हिम्‍मत कर अपनी फिल्‍म सिनेमाघर में ला रहा है और रिस्‍क ले रहा है। लिहाजा मल्‍टीप्‍लेक्‍स वालों को यह बात समझनी होगी। वरना प्रोड्यूसर सिनेमाघरों में आने के बजाय डायरेक्‍ट ओटीटी पर चला जाएगा। अभी वक्‍त बुरा चल रहा है तो हरेक को एक दूसरे की बात समझनी होगी।”

मल्‍टीप्‍लेक्‍सेज को छोड़ 800 स्‍क्रीन मिल पा रही है ‘थलाईवी’ को

इधर, ‘थलाईवी’ के प्रोड्यूसर विष्‍णुवर्धन स्‍क्रीन काउंट का भी जिक्र करते हैं। वो इस बारे में कहते हैं, “फिलहाल तो हम साउथ में तमिल और तेलुगू में 800 स्‍क्रीन ले रहे हैं। बाकी इंडिया में मल्‍टीप्‍लेक्‍सेज को छोड़ हमें 800 स्‍क्रीन मिल पा रही हैं। ‘बेलबॉटम’ भी इंडिया भर में 100 स्‍क्रीन पर आई थी। हमारा बात सिर्फ चार नैशनल मल्‍टीप्‍लेक्‍स चेन नहीं मान रही हैं। फिर भी हम बाकी इंडिया में 800 स्‍क्रीन पर आ रहे हैं।”

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